आगरा में पहला ब्रिक्स एमएसएमई फोरम: लचीलापन, नवाचार और सहयोग पर वैश्विक चर्चा
19 जून 2026 को आगरा में शुरू हो रहा पहला ब्रिक्स एमएसएमई फोरम भारत समेत कई देशों के नीति निर्माताओं और उद्यमियों को एक मंच देगा। लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित इस बैठक में एमएसएमई इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श होगा।
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय 19 जून 2026 को ऐतिहासिक शहर आगरा में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी करने जा रहा है। "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" थीम के तहत आयोजित यह पहला ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरी एसएमई कार्य समूह की बैठक वैश्विक स्तर पर छोटे उद्यमों के भविष्य को आकार देने वाली साझेदारियों का आधार तैयार करेगी।
इस कार्यक्रम में ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के प्रमुख हितधारक एकत्र होंगे, जो एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाने और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतियां तैयार करेंगे।
भारत का एमएसएमई क्षेत्र: अर्थव्यवस्था की रीढ़
भारत का लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस क्षेत्र में 86 लाख से अधिक उद्यम सक्रिय हैं, जो जीडीपी में 31.1 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देते हैं। विनिर्माण उत्पादन का 35.4 प्रतिशत और निर्यात का 48.58 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। लाखों लोगों को रोजगार देने वाला यह क्षेत्र पारंपरिक कारीगरों से लेकर आधुनिक टेक-स्टार्टअप्स तक की विविधता का प्रतीक है।
इन आंकड़ों के पीछे करोड़ों उद्यमियों की मेहनत, रचनात्मकता और दृढ़ संकल्प छिपा है। ग्रामीण क्षेत्रों में हस्तशिल्प से जुड़े उद्यम हों या शहरों में प्रौद्योगिकी आधारित व्यवसाय, एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की असली ताकत हैं। इस फोरम के जरिए भारत अपने सफल मॉडल को अन्य ब्रिक्स देशों के साथ साझा करने का अवसर प्राप्त करेगा।
ब्रिक्स देशों का सहयोग: भविष्य तैयार करने की दिशा
ब्रिक्स देश मिलकर ऐसे एमएसएमई इकोसिस्टम पर चर्चा करेंगे जो भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो। कार्यक्रम के दौरान एमएसएमई की उत्कृष्टता को दर्शाती एक प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा, जो विभिन्न देशों की सफल पहलों को प्रदर्शित करेगा।
तीसरी एसएमई कार्य समूह की बैठक "एमएसएमई इकोसिस्टम का निर्माण - सतत जड़ों से वैश्विक मार्गों तक" विषय पर केंद्रित होगी। इसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, यूएई और अन्य ब्रिक्स सहयोगी देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
निजी क्षेत्र की भूमिका और प्रमुख चर्चा विषय
ब्रिक्स देशों के निजी क्षेत्र के हितधारक तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करेंगे - एमएसएमई के लिए वित्त तक बेहतर पहुंच, प्रौद्योगिकी उपलब्धता और स्थिरता पर आधारित विकास। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और उद्योग विशेषज्ञ सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतिगत अनुभवों तथा सफल केस स्टडीज साझा करेंगे।
यह मंच ज्ञान आदान-प्रदान, नए अवसरों की पहचान और दीर्घकालिक साझेदारियों के निर्माण का बेहतरीन माध्यम साबित होगा। भारत इस अवसर पर अपने डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों के अनुभव साझा करेगा।
वैश्विक प्रभाव और अपेक्षाएं
पहला ब्रिक्स एमएसएमई फोरम ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाई देगा। इससे छोटे उद्यमों को वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम समावेशी आर्थिक विकास, पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर देगा।
आगरा जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर में इस आयोजन का होना प्रतीकात्मक भी है, जो भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक महत्वाकांक्षाओं के मेल को दर्शाता है।
निष्कर्ष: यह ब्रिक्स एमएसएमई फोरम छोटे और मध्यम उद्यमों को वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। भारत की अगुवाई में होने वाला यह कार्यक्रम लचीलापन, नवाचार और स्थिरता के नए मानक स्थापित करेगा, जो आने वाले वर्षों में कई देशों के एमएसएमई क्षेत्र को लाभ पहुंचाएगा।
DK Choudhary